| फेडरेशन ऑफ इंडियन चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसीआई) | ||
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भारत में मुक्त व्यापार को प्रोत्साहन प्रदान करने वाली एक केन्द्रीय संस्था है – फिकी। बदलते समय के साथ फिक्की ने भारतीय व्यापार-उद्योगों को उनकी प्रतियोगी क्षमता और वैश्विक पहुंच बढ़ाने में काफी मदद करके उन्हें बहुत सशक्त बनाया है। पूरे देश की 1500 कंपनियां और 500 से अधिक चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एसोसिएशंस फिक्की के सदस्य हैं। यह संस्था भारतीय व्यापार-उद्योग को समान दृष्टिकोण से समर्थन देती है और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से 2,50,000 व्यावसायिक इकाइयों से वार्तालाप के माध्यम से जुड़ी हुई है। फिकी के पास विनिर्माण, वितरणात्मक व्यापार और सेवाओं के बडे़, मध्यम, छोटे और नन्हें क्षेत्रों से उद्यमों की एक विस्तारित और सीधी सदस्यता है। ग्लोबल नेटवर्किंग तथा सर्वोच्च राजनैतिक स्तर पर रिसर्च और प्रभावी बात-चीत के जरिए फिक्की एक व्यवहार्य और व्यावसायिक समाधान प्रदाता के रूप में अपनी अग्रणी स्थिति कायम रखती है। यह भारत का सबसे पुराना शीर्ष व्यावसायिक संगठन है जिसकी स्थापना 1927 में महात्मा गांधी की सलाह पर हुई। इस संगठन का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के साथ जुड़ा हुआ है। इसने अपनी स्थापना के बाद आर्थिक राष्ट्रवाद को विभेदकारी औपनिवेशिक आर्थिक नीतियों के खिलाफ राजनैतिक हथियार के रूप में स्वयं को प्रयुक्त किया। भारत में बदलती आर्थिक स्थितियों तथा उनके अनुसार बदलते एजेंडों के साथ संगठन का उद्देश्य तथा प्रतिबद्धता आज भी वही है। ज्ञान संचालित वैश्विक अर्थव्यव्स्था में फिक्की गुणवत्ता, स्पर्धात्मकता, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और व्यवसाय-सरकार-नागरिक समाज की भागीदारी को महत्व प्रदान करके नैतिकता आधारित व्यापार व्यवहारों का प्रसार करती है। जिसके जरिए सामान्य मानव के जीवन-स्तर में सुधार होता है। |
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| महाराष्ट्र इकोनॉमिक डेवलपमेंट काउंसिल (एमईडीसी) | ||
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महाराष्ट्र इकोनॉमिक डेवलपमेंट काउंसिल की स्थापना चार दशकों से भी अधिक समय पहले महाराष्ट्र के अग्रणी चेंबर ऑफ कॉमर्स तथा औद्योगिक और व्यावसायिक संगठनों द्वारा व्यापार और उद्योग की सामाजिक जिम्मेदारी के एक प्रतीक के रूप में भारत सरकार के योजना आयोग के पूर्व उप-अध्यक्ष व प्रख्यात अर्थशास्त्री स्व. डॉ. धनंजय राव गाडगिल के नेतृत्व में 29 जून 1957 को की गई। व्यवसाय, उद्योग, अर्थव्यवस्था तथा प्रशासनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोग जिन्होंने राज्य में व्यापार और उद्योग की सेवा के लिए इस संगठन के अध्यक्ष के रूप में काम कर चुके हैं उसमें स्व. श्री लालचंद हीराचंद, स्व. श्री एस एल किर्लोस्कर, स्वी. नानी पालखीवाला, श्री केशुभ महिंद्रा, श्री सुभाष दांडेकर, श्री अदी गोदरेज और श्री. एम.एन. चैनी इत्यादि शामिल हैं। इन सबके कुशल नेतृत्व में एमईडीसी अपनी अनुसंधान उन्मुखी सेवाओं और सदस्यता की प्रकृति के आधार पर न सिर्फ महाराष्ट्र का अपितु पूरे भारत का अद्वितीय शोध और विकास संगठन बनकर उभरा है। | |
| द एसोसिएटेड चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (एसोचैम) | |||
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| महाराष्ट्र चेंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (एमएसीसीआईए) | ||
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महाराष्ट्र चेंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर फेडरेशन ऑफ इंडियन चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसीआई- फिकी), नई दिल्ली. इंटरनेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स- नेशनल कमेटी, नई दिल्ली, इंडियन काउंसिल ऑफ आर्बिट्रेशन, नई दिल्ली, ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ एम्प्लोयर्स, नई दिल्ली जैसे उद्योग और व्यापार जगत के राष्ट्रीय स्तर के संगठनों से सम्बद्ध है। चेंबर की सदस्यता महाराष्ट्र में उद्योग, व्यवसाय, वाणिज्य तथा कृषि में संलग्न किसी को भी बिना जाति, सम्प्रदाय, समुदाय, भाषा और धर्म के भेदभाव के मिल सकती है। इन वर्गों से सम्बद्ध भारत से बाहर रहने वाले व्यक्ति या संगठनों को भी इसकी एसोसिएट मेंबरशिप मिल सकती है। संघीय प्रणाली के आधार पर काम करने वाले इस संगठन का मुख्यालय मुंबई में है। इसकी शाखा नाशिक में है और पूरे महाराष्ट्र राज्य में तालुका तथा जिला स्तर पर व्यापार और उद्योग के संबद्ध स्थानीय संगठनों की एक बडी संख्या है। |
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| नॉसकॉम ( नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेस कंपनीज ) | ||
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नॉसकॉम (NASSCOM®) भारत में आईटी-बीपीओ क्षेत्र की प्रमुख ट्रेडिंग संस्था और चेंबर ऑफ कॉमर्स है। नॉसकॉम एक वैश्विक व्यापार संस्था है, जिसमें 1200 से अधिक सदस्य हैं। उसमें से 250 से अधिक कंपनियां अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपियन युनियन और एशिया पेसिफिक क्षेत्र की हैं। नॉसकॉम की सदस्य और सहयोगी सदस्य कंपनियां सर्विसेस, प्रॉडक्ट्स, आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट, आर एंड डी सेवाएं, इ-कॉमर्स एंड वेब सर्विसेस, इंजीनियरिंग सर्विसेस आफशोरिंग तथा एनिमेशन व गेमिंग के क्षेत्रों में कार्यरत हैं। भारत के कुल औद्योगिक राजस्व का 95% हिस्सा नॉसकॉम के सदस्यों से ही प्राप्त होता है और नॉसकॉम ने 20 लाख से अधिक पेशेवरों को नियोजित किया हुआ है। | |
| फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेस (एफआईएसएमई) | ||
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फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेस (एफआईएसएमई)
एफआईएसएमई एक ऐसा नेटवर्क है जिसमें राज्य स्तर के 1,00,000 से अधिक ऐसे व्यावसायिक संगठन शामिल हैं जो लघु तथा मध्यम आकार के उद्योगों का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा विभिन्न सेक्टरों से सम्बद्ध हैं। इसकी सदस्यता में छोटे और मध्यम उद्यमों के क्षेत्रीय व क्षेत्रीय संगठनों का समावेश है। सभी बड़े सेक्टरों से सम्बद्ध उद्योग इसकी सदस्य पा सकते हैं। सभी प्रमुख क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योगों को भी इसकी सीधी सदस्यता लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इस नेटवर्क के जरिए कवर क्षेत्रों में निम्नलिखित शामिल हैं:
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| फ्यूचर्स इंडस्ट्री एसोसिएशन (एफआईए) | ||
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एफआईए एक अकेला ऐसा संगठन है, जो फ्यूचर मार्केट (वायदा बाजार) में रुचि रखने वाले सभी संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके 180 से अधिक कार्पोरेट मेंबर हैं जो हजारों उद्योग सहभागियों तक पहुंचते हैं। इसके नियमित सदस्य फ्यूचर्स कमीशन मर्चेंट है। एफआईए का अनुमान है कि उसके नियमित सदस्य अमेरिकी फ्यूचर्स एक्सचेंज में होने वाले कस्टमर व्यवसाय में 80 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं। इन सदस्यों के माध्यम से एफ आईए वायदा उद्योग के ग्राहकों की जरूरतों का प्रतिनिधित्व करता है। वास्तव में, ग्राहक इक्विटी के रूप में उसके सदस्यों में टॉप 20 कंपनियों का समावेश है। इसके सहयोगी सदस्यों में अमेरिका तथा विदेशों में स्थित अंतर्राष्ट्रीय एक्सचेंज, बैंक, लीगल तथा एकाउटिंग फर्में, इन्ट्रोड्यूशिंग ब्रोकर्स, कमोडिटी ट्रेडिंग सलाहकार, कमोडिटी पूल ऑपरेटरों तथा अन्य बाजार प्रयोक्ताओं और अमेरिका तथा विदेशों में मुख्यालय वाले सूचना और उपकरण प्रदाताओं का समावेश है। |
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| द एसोसिएशन ऑफ फ्यूचर्स मार्केट्स (एएफएम) | ||
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एसोसिएशन के उद्देश्य
द एसोसिएशन ऑफ फ्यूचर्स मार्केट (एएफएम) का उद्देश्य नये डेरिवेटिव्स तथा उससे सम्बद्ध बाजार के लिए काम करने वाले संगठनों की स्थापना को प्रोत्साहन तथा सहायता प्रदान करना और संबंधों को मजबूती देने तथा अनुभव के हस्तांतरण के लिए विभिन्न एक्सचेंजों के बीच आपसी संवाद स्थापित करने हेतु इंटरनेशनल कांफ्रेंस आयोजित करना है। फ्यूचर्स एक्सचेंजों के लिए आयोजित अंतरराष्ट्रीय फोरम में भागीदारी सुनिश्चित करने का एसोसिएशन प्रयास करता है। सदस्यता बाजार में भाग लेने वाले विभिन्न वर्ग तथा संस्थाएं इसकी सदस्यता ले सकती है जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न एक्सचेंज, क्लियरिंग हाउस, ट्रेडर और साथ ही उद्योगों के अन्य भागीदारों ने भी एएफएम से जुडे़ हैं और उस समर्थन दिया हुआ है। इसके सदस्य हैं। प्रति वर्ष अलग-अलग स्थानों पर इसके कांफ्रेंस आयोजित किये जाते हैं (हाल ही में उन्हें इस्तांबुल, बुकारेस्ट और बुडापेस्ट में आयोजित किया गया था) उभरते एक्सचेंजों द्वारा सामना किए जाने वाले मुद्दों के लिए पैनल विचार-विमर्श आयोजित किए जाते हैं तथा उन मुद्दों को स्थापित बाजारों के साथ-साथ बाजार सहयोगियों के साथ भी मिलकर उन पर विचार-विमर्श किया जाता है। चर्चा का केन्द्र बिक्री-भाषण न होकर सिर्फ सक्रिय विचार-विमर्श होता है जो कि इसे भागीदारों के लिए और रोचक बनाता है। जाहिर है, सामाजिक हिस्सों को नहीं भुलाया जाता है- नेटवर्किंग किसी भी एसोसिएशन का एक अभिन्न अंग है और किसी भी मेजबान देश की संस्कृति व इतिहास का कुछ भी सीखने के लिए समय लगता है। | |
| द इंटरनेशनल आर्गेनाइजेशन ऑफ सिक्युरिटीज कमीशंस (आईओएससीओ) | ||
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द इंटरनेशनल आर्गेनाइजेशन ऑफ सिक्युरिटीज कमीशंस (आईओएससीओ) द इंटरनेशनल आर्गेनाइजेशन ऑफ सिक्युरिटीज कमीशन की सदस्यता रखने वाली एजेंसियों की बैठक हाल ही में हुई जिसमें इसके स्थायी ढांचों के जरिए निम्नलिखित संकल्प पारित किये गये:
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| स्विस फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस एसोसिएशन (एसएफओए) | ||
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द स्विस फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस एसोसिएशन (एसएफओए) की स्थापना वर्ष 1979 में एक गैर लाभकारी पेशेवर संगठन के रूप में डेरिवेटिव फाइनेंशियल इन्स्ट्रूमेंट्स को बढा़वा देने के उद्देश्य से, खासकर सर्वाधिक संभव ऑडियेंस और अपने सदस्यों के हितो की सेवा करने के लिए फाइनेंशियल इन्स्ट्रूमेंट्स व कमोडिटीज पर मानक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस अनुबंधों के लिए हुई थी। एसएफओए कमोडिटी व फाइनेंशियल डेरिवेटिव्स के उपयोगकर्ताओं की सेवा के साथ-साथ पेशेवरों, उनके संस्थानों और एक्सचेंजों के लिए भी कार्य करता है। स्थापित एक्सचेंजों पर कारोबारित कमोडिटीज के साथ स्विस आधारित व्यवसायों के सौदों का प्रतिनिधित्व करने के उद्देश्य से इसकी स्थापना वर्ष 1980 में स्विस कमोडिटीज इंडस्ट्री एसोसिएशन (एससीआईए) नाम के तहत हुई थी। दो साल बाद फ्यूचर्स को समाहित करने के लिए इसका नाम बदलकर एससीएफए और फिर आखिरकार वर्ष 1997 में कमोडिटीज शब्द को हटाने के लिए इसमें ऑप्शंस को जोड़कर (एसएफओए) हो गया। |
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| साउथ एशियन फेडरेशन ऑफ एक्सचेंजेस (एसएएफई) | ||
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साउथ एशियन फेडरेशन ऑफ एक्सचेंजेस (एसएएफई), क्षेत्रीय प्रतिभूति बाजारों के विकास के लिए दक्षिण एशियाई बाजारों द्वारा शुरू किया गया एक मंच है। एसएएफई का आरंभ क्षेत्रीय और वैश्विक एकीकरण की दिशा में दक्षिण एशियाई पूंजी बाजारों की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वैश्वीकरण की अनिवार्यताएं राष्ट्रों के बीच व्यापार, राजनीति और क्रॉस-सांस्कृतिक गतिविधियों के संदर्भ में बढ़ती निर्भरता की जरूरत पर जोर देती हैं। परिणामस्वरूप, दक्षिण एशियाई पूंजी बाजार एक दूसरे से या बाकी दुनिया से अब और अलग नहीं रह सकते। बाजारों की समस्याएं और उनके हित अतिव्यापी हैं जिन्हें पहचान कर कार्य करना होगा। एसएएफई इस बोध की तार्किक परिणति है। | |
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