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आर्बिट्रेशन क्या है ? |
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| आर्बिट्रेशन, एक्सचेंज पर किये गए सौदों के संबंध में ट्रेडिंग सदस्यों और क्लाइंटों के बीच उत्पन्न विवादों को सुलझाने की एक अर्ध न्यायिक प्रक्रिया है। आर्बिट्रेशन का उद्देश्य विवादों का जल्द कानूनी समाधान होता है। जब किसी एक पक्ष को लगता है कि शिकायत का निवारण चाहे दूसरे पक्ष द्वारा या एक्सचेंज की शिकायत निवारण प्रक्रिया के माध्यम से संतोषजनक रूप से नहीं हुआ है तो कोई भी पक्ष आर्बिट्रेशन का माध्यम चुन सकता है। |
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आर्बिट्रेशन के लिए कौन आवेदन कर सकता है? |
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| विवाद का कोई भी एक पक्ष जो विवाद के समाधान हेतु कानूनी उपाय चाहता हो वह आर्बिट्रेशन के लिए आवेदन कर सकता है। दूसरे शब्दों में क्लाइंट्स व ट्रेडिंग सदस्य आर्बिट्रेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। |
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वे कौन व्यक्ति होते हैं जो आर्बिट्रेटर्स के रूप में कार्य कर सकते हैं? |
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| एक्सचेंज योग्यता प्राप्त लोगों की सूची प्रदान करता है। आर्बिट्रेटरों की सूची का का हिस्सा बनने वाले व्यक्ति वे होते हैं जो बैंकिंग, वित्त, विधिक (न्यायाधीशों) और पूंजी बाजार क्षेत्रों (ब्रोकरों) सहित अपने संबंधित क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हैं। |
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एक्सचेंज पर आर्बिट्रेशन सुविधा का लाभ कौन उठा सकता है? |
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| एक्सचेंज पर आर्बिट्रेशन की सुविधा का लाभ निम्न व्यक्तियों द्वारा उठाया जा सकता है: |
- ऐसे निवेशक जो अपने ट्रेडिंग सदस्यों के माध्यम से एक्सचेंज पर कारोबार किए हैं तथा जिनके पास एक्सचेंज के ट्रेडिंग सदस्य द्वारा जारी किया गया वैध कांट्रेक्ट नोट है।
- ऐसे ट्रेडिंग सदस्य जिनका किसी दूसरे ट्रेडिंग सदस्य या ग्राहक/घटक के साथ कोई दावा/विवाद या मतभेद है।
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आर्बिट्रेशन के लिए आवेदन करते समय किन विभिन्न फॉर्मों/दस्तावेजों को सबमिट करना आवश्यक होता है? |
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सबमिट किए जाने वाले आवश्यक दस्तावेजों की सूची नीचे दी गई है। फार्म/दस्तावेज उद्देश्य
अनिवार्य
- फॉर्म नं. I: आर्बिट्रेशन के लिए आवेदन
- फॉर्म नं.II: अवरोही क्रम (डिसेंडिंग ऑर्डर) में आर्बिट्रेटर वरीयता प्रदान करने के लिए
- मामले का बयान: तारीख अनुसार मामले का संक्षिप्त विवरण, दावा राशि निर्धारित करने और आर्बिट्रेशन के माध्यम से सहायता की मांग का आधार।
- आर्बिट्रेशन के खर्चे के लिए चेक/पे ऑर्डर/ डिमांड ड्राफ्ट
अतिरिक्त दस्तावेज*
- फंड्स के लिए विवाद के मामले में स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट्स
- मामले में प्रासंगिक व संगत कांट्रेक्ट नोटों एवं बिलों की प्रतियां या आर्बिट्रेटर द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार।
* ऐसे मामले में जहां आवेदन करते समय क्लाइंट के पास अतिरिक्त दस्तावेज नहीं हैं तो उन्हें आर्बिट्रेशन के दौरान सबमिट किया जा सकता है। |
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यदि मैं आर्बिट्रेशन के लिए आवेदन करना चाहता हूं तो आर्बिट्रेशन आवेदन फॉर्म मैं किस प्रकार प्राप्त कर सकता हूं? |
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| आर्बिट्रेशन फॉर्म एक्सचेंज की वेबसाइट http://www.mcxindia.com पर उपलब्ध हैं और आवेदक उसे डाउनलोड कर सकता है तथा आवेदन करने के लिए उस फॉर्म का उपयोग कर सकता है। विकल्प के तौर पर क्लाइंट्स grievance@mcxindia.com पर अपने पूर्ण डॉक पते के साथ ई-मेल भेंजकर भी फॉर्म के लिए अनुरोध कर सकते हैं जिससे कि उन्हें फॉर्म भेंजे जा सकें। |
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ट्रेडिंग सदस्य के खिलाफ क्लाइंट कहां पर आर्बिट्रेशन दायर कर सकता है? |
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| आर्बिट्रेशन के लिए आवेदन को रीजनल आर्बिट्रेशन सेंटर (आरएसी) अर्थात मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई या सामान्य रूप से जहां ग्राहक का निवास स्थान है उस राज्य में दायर करना पडे़गा। |
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आर्बिट्रेशन हेतु आवेदन दाखिल करने के लिए एक्सचेंज में जमा की जाने वाली आर्बिट्रेशन फीस कितनी है? |
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| दावा की गई राशि के आधार पर ट्रेडिंग सदस्य को एक्सचेंज के पास अमानत राशि (डिपॉजिट) रखना आवश्यक होता है चाहे वह एक आवेदक हो या एक प्रत्यार्थी हो। |
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| सं. |
दावा राशि |
अमानत राशि (डिपॉजिट) |
| 1 |
रु.5,00,000/- तक |
रु.8,000 |
| 2 |
रु.5,00,001 से रु.25,00,000/-तक |
रु.10,000 |
| 3 |
रु.25,00,000/- और अधिक |
रु.14,000 |
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| ऐसे मामले में जहां एक निवेशक (ट्रेडिंग सदस्य का ग्राहक) एक आवेदक या प्रत्यार्थी है तो उसे दावा की गई राशि के आधार पर एक्सचेंज के पास निम्नलिखित अनुसार अमानत राशि (डिपॉजिट) रखना आवश्यक होता है: |
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| सं. |
दावा राशि |
अमानत राशि (डिपॉजिट) |
| 1 |
रु.5,00,000/- तक |
शून्य* |
| 2 |
रु.5,00,000/- से रु.25,00,000/-तक |
रु.8,000 |
| 3 |
रु.25,00,000/- और अधिक |
रु.14,000 |
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* रु.5 लाख के दावे तक आर्बिट्रेशन का खर्चा ग्राहक/घटक की ओर से एक्सचेंज द्वारा वहन किया जाता है।
प्रति-दावा (काउंटर क्लेम) और/या अतिरिक्त दावा के मामले में संबंधित पक्ष जिसने प्रति-दावा (काउंटर क्लेम) या अतिरिक्त दावा किया है, उसे मामलानुसार ऊपर वर्णित फीस ढांचे के अनुसार ही अतिरिक्त राशि जमा करनी होगी।
ऊपर वर्णित अमानत राशियों (डिपॉजिट्स) के अलावा यदि आर्बिट्रेशन के खर्चे को पूरा करने के लिए अमानत राशि अपर्याप्त होती है तो एक्सचेंज अतिरिक्त अमानत राशियों की मांग कर सकता है। अतिरिक्त अमानत राशियां अमानत राशियों (डिपॉजिट्स) के एक भाग के रूप में होंगी व तदनुसार व्यवहृत होंगी। |
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विवाद में संलग्न पक्षों को और कौन सी फीस, शुल्कों, लागतों का वहन करना होता है ? |
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| आर्बिट्रेटर की नियुक्ति और आर्बिट्रेशन की कार्यवाही के संचालन से संबंधित सभी फीस व शुल्क संदर्भित पक्षों द्वारा समान रूप से या आर्बिट्रेटर द्वारा निर्धारित व निर्णित अनुपात अनुसार वहन किए जाएंगे। इन फीसों/शुल्कों को आर्बिट्रेशन का आवेदन करते समय रखी गई अमानत राशि (डिपॉजिट्स) में से लिया जाएगा और शेष राशि यदि कुछ बचती है तो उसे संबंधित पक्षों को वापस कर दिया जाएगा। दोनों में से किसी भी पक्ष को यदि फीस व शुल्कों के अतिरिक्त कुछ भी खर्च लगाया जाता है तो उसे आर्बिट्रेशन प्रक्रिया शुरू करने के लिए दोनों पक्षों द्वारा वहन किया जाएगा तथा आर्बिट्रेटर के निर्णय के अनुसार निर्धारित किया जाएगा। जब तक कि आर्बिट्रेटर कुछ अलग निर्देश नहीं देता, प्रत्येक पक्ष अपने यातायात और अन्य आकस्मिक खर्चों का वहन खुद करेंगे। |
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किसी भी प्रकार का दावा (क्लेम), मतभेद या विवाद की स्थिति में आर्बिट्रेशन हेतु आवेदन दायर करने के लिए समयावधि सीमा क्या है? |
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| आर्बिट्रेशन हेतु आवेदन को अंतिम ट्रांजेक्शंस या डिलीवरी तथा पेमेंट की तारीख से 1 साल के अंदर दायर किया जाना |
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एक आर्बिट्रेटर की नियुक्ति कैसे होती है? |
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| यदि आवेदक द्वारा किए गए क्लेम की वैल्यू या दूसरे पक्ष द्वारा किए गए काउंटर-क्लेम की वैल्यू 10 लाख से कम या उसके बराबर है तो एकमात्र मध्यस्थ (सोल आर्बिट्रेटर) की नियुक्ति की जाती है। और यदि उसकी वैल्यू रु. 10 लाख से अधिक होती है तो तीन आर्बिट्रेटरों के पैनल की नियुक्ति की जाती है। |
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ऐसे मामले में जहां क्लेम मतभेद या विवाद छोटी राशि के लिए है, क्या कोई पक्ष सुनवाई के लिए अनुरोध कर सकता है? |
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| यदि क्लेम मतभेद या विवाद की वैल्यू एक लाख रुपये या उससे कम है तो विवादित पक्षों के लिए कोई सुनवाई नहीं होगी। हालांकि यदि क्लेम मतभेद या विवाद की वैल्यू एक लाख रुपये से अधिक होती है तो आर्बिट्रेटर विवादित पक्षों को सुनवाई का प्रस्ताव देगा जब तक कि दोनों ही पक्षों ने लिखित स्वरूप में इस तरह की सुनवाई के लिए अपने अधिकारों का अधित्याग न किया हो। |
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क्या सोल आर्बिट्रेटर या आर्बिट्रेटरों का पैनल सुनवाई का स्थगन आदेश दे सकता है? |
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| हां, यदि दोनों में से कोई भी एक पक्ष सुनवाई का स्थगन चाहता है तो उन्हें स्थगन मांगने के कारणों को बताते हुए एक्सचेंज के पास अग्रिम रूप से एक आवेदन करना चाहिए जिससे कि एक्सचेंज ऐसे अनुरोध को आर्बिट्रेटर को भेज सके। आर्बिट्रेटर अपने/उसके विवेकानुसार अपने/उसके द्वारा उपयुक्त समझी गई शर्तों के अधीन स्थगन स्वीकार या प्रदान कर सकता है। |
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क्या सहमत शर्तों पर निर्णय दिया जा सकता है? |
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| हां, यदि एक आर्बिट्रेटर की नियुक्ति के बाद विवाद को सभी पक्षों द्वारा मैत्रीपूर्ण तरीके से शांतिपूर्वक निपटा लिया जाता है तो आर्बिट्रेटर सहमत शर्तों पर आर्बिट्रेशन के रूप में उस विवाद के निपटारे को दर्ज कर लेगा। |
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सोल आर्बिट्रेटर / आर्बिट्रेटरों के पैनल द्वारा निर्णय किस प्रकार दिया जाता है? |
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| निर्णय को लिखित रूप से तीन मूल प्रतियों में विधिवत दिनांकित तथा सोल आर्बिट्रेटर या पैनल ऑफ आर्बिट्रेटर्स के मामले में सभी तीनों आर्बिट्रेटरों द्वारा हस्ताक्षरित करके दिया जाएगा। |
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क्या विवादित पक्ष क्लेम राशि पर ब्याज का अनुरोध कर सकते हैं? |
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| आर्बिट्रेटर जैसा उचित समझेगा उस क्लेम राशि पर जिसके लिए किसी विशेष ब्याज दर व अवधि के लिए निर्णय दिया गया है, उस क्लेम राशि में ब्याज शामिल कर सकता है। |
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क्या एक्सचेंज में आर्बिट्रेशन के लिए कोई अपील का प्रावधान है? |
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| नहीं। हालांकि संदर्भित कोई भी पक्ष जो आर्बिट्रेशन के निर्णय से संतुष्ट नहीं है, वह आर्बिट्रेशन एक्ट में प्रदान किए गए अनुसार उस निर्णय को न्यायालय की सक्षम अदालत में चुनौती दे सकता है। हालांकि संदर्भित पक्ष को निर्णय राशि को अपील दायर करने के पहले एक्सचेंज के पास जमा करना होगा और ऐसी राशि को एक्सचेंज के पास स्थगित रखा जाएगा तथा अंतत: उसे अदालत के निर्णय के अनुसार दिया जाएगा। |
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कोई निर्णय कब एक डिक्री बन जाता है? |
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| कोई भी निर्णय (अवार्ड) एक डिक्री तब बन जाता है जब निर्णय रद्द कराने के लिए आवेदन करने की अवधि समाप्त हो चुकी हो अर्थात निर्णय प्राप्त करने की तारीख से 3 महीने की अवधि की समाप्ति के बाद या निर्णय को रद्द करने के लिए किए गए आवेदन को उपयुक्त अदालत द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया हो। ऐसे मामले में आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलेशन अधिनियम 1996 के प्रावधानों के तहत निर्णय को इस प्रकार से लागू किया जाएगा जैसे कि यह अदालत की डिक्री हो। |
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