| सामान्य लक्षण |
| प्राकृतिक रबर (एनआर) पौधों की खेती के रूप में लगाये गये रबर वृक्षों से प्राप्त लैटेक्स अथवा को गुलम से पैदा किया जाता है. एनआर का प्रोसेस और विपणन किया जानेवाला सबसे महत्वपूर्ण स्वरूप इस प्रकार है। शीट्स, क्रेप्स, ब्लॉक रबर, और प्रीजर्ब्ड लैटेक्स कांसेंट्रेट्स। भारत में आरएसएस 1, आरएसएस 2, आरएसएस 3, आरएसएस 4, आरएसएस 5 नाम से प्रचलित शीट रबर का सामान्यत : उत्पादन और विपणन होता है। ब्लाक रबर, आईएसएनआर के ग्रेड में प्रचलित है। |
| |
| वैश्विक परिदृश्य |
- विश्व भर में थाईलैंड, इंडोनेशिया, भारत, चीन, मलेशिया, वियतनाम प्रमुख रबर उत्पादक हैं।
- वैश्विक उत्पादन 60-80 लाख टन के बीच में होता है। वर्ष 2003 में 79 लाख टन उत्पादन हुआ जिसमें एशियाई देशों में 67.6 लाख टन का उत्पादन हुआ।
- उपभोग के दृष्टिकोण से वर्ष 2003 में वैश्विक एनआर उपभोग 78.9 लाख टन रहा है, जिसमें से केवल भारत और चीन ने 19 लाख टन का उपभोग किया था। वर्ष 2003 में कुल सिंथेटिक रबर उपभोग 11.3 लाख टन था।
- वैश्विक रबर उत्पादन का तकरीबन 60 प्रतिशत परिवहन क्षेत्र में उपयोग हुआ है। इस क्षेत्र में प्राकृतिक और सिंथेटिक रबर अकेले उपयोग नहीं किये जा सकते है। इनकी ब्लेंडिंग करनी होती है।
|
| |
| प्रमुख विश्व बाजार |
| टोकियो कमोडिटी एक्सचेंज, सिंगापुर कमोडिटी एक्सचेंज, ओसाका मर्केंटाइल एक्सचेंज, रबर का वायदा व्यापार करने वाले प्रमुख एक्सचेंज हैं। कुआलालमपुर, लंदन, न्यूयार्क प्रमुख भौ2तिक बाजार (फिजिकल मार्केट) हैं। |
| |
| भारतीय परिदृश्य |
- भारत में रबर उत्पादन करीब 6-7 लाख टन है।
- केरल, भारत के रबर उत्पादन में 90 प्रतिशत हिस्सेदारी निभाता है। अन्य उत्पादक कर्नाटक है।
- आरएसएस (रिब्ड स्मोक्ड शीट्स) उत्पादन में 72 प्रतिशत और आयात में 45 फीसदी हिस्सेदारी निभाता है। ब्लाक रबर उत्पादन में 10 प्रतिशत और आयात में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी निभाता है।
- देश में उत्पादित 7 लाख टन रबर की 52% खपत केवल टायर उद्योग में होती है।
- भारत से टायर के रूप में प्रमुखता से रबर का निर्यात किया जाता है। भारत का टायर निर्यात एक वर्ष में 1200-1300 करोड़ रु. के आस-पास होता है। पुनर्निर्यात के लिए एडवांस लाइसेंस स्कीम के तहत शुल्क मुक्त (ड्यूटी फ्री) आयात की अनुमति है और अनिवार्य नियम यह है कि 100 किग्रा निर्यात के समक्ष केवल 44 किग्रा प्राकृतिक रबर का आयात किया जा सकता है। भारत का आयात वर्ष दर वर्ष बदलता रहता और वर्तमान में लगभग 50000-60000 टन प्रति वर्ष है। ओपेन जनरल लायसेंस के अंतर्गत नेचुरल रबर का ड्यूटी-पेड आयात पर 20% आयात शुल्क लगता है।
|
| |
| प्रमुख विश्व बाजार |
| केरल के कोट्टायम, कोची, कोजीकोडे और कन्नुर प्रमुख प्राथमिक बाजार हैं। |
| |
| वर्ष 2002-2004 में कोट्टायम में आरएसएस4 ग्रेड रबर की दैनिक कीमत वोलाटिलिटी |
| वोलाटिलिटी (प्रतिशत) प्रतिदिन | < 1 | 1 - 3 | > 3 | | कितनी बार (प्रतिशत) | 78.95 | 19.74 | 1.32 | |
| |
| बाजार को प्रभावित करने वाले कारक |
- रबर का उत्पादन महीनों के बीच घटता-बढ़ता है और यह बरसात के मौसम में साधारणत : कम रहता है।
- ऑटोमोबाइल उद्योग में उत्पादन वृद्धि।
- टायर उत्पादकों द्वारा घरेलू उत्पादन और आयातित रबर के सदुपयोग का अनुपात
- सरकारी नीतियों का रबर कीमतों पर गहरा असर पड़ता है। इसमें सरकारी अर्थसहाय (सब्सिडी), बंदरगाहों पर प्रतिबंध इत्यादि शामिल है।
- अंतर्राष्ट्रीय रबर कीमत मूवमेंट का धीमा असर होता है।
- स्टॉकिस्ट्स और सट्टेबाजा भी कीमतों को प्रभावित करने में उल्लेखनीयच भूमिका निभाते हैं।
|