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कॉटन एम स्टेपल
 
सामान्य विशेषताएं
  • सभी प्राकृतिक रेशों में कपास (कॉटन) सबसे महत्वपूर्ण है। यह टेक्सटाइल इंडस्ट्री द्वारा उपयोग किए जा रहे विश्व के कुल फाइबर के आधे की हिस्सेदारी रखता है। ‘व्हाइट गोल्ड’ के नाम से भी जाना जाने वाला कॉटन को भारत में सभी नकदी फसलों में एक प्रमुख स्थान हासिल है।
  • कपास (रॉ कॉटन और सीड कॉटन के नाम से भी जाना जाता है) बीज को कवर किए हुए बिना ओटा हुआ कॉटन है या एक सफेद रेशेदार पदार्थ (लिंट) है जो कपास के पौधे (गॉसपियम प्रजाति) से प्राप्त किया जाता है।
  • ओटना (जिनिंग) एक प्रक्रिया है जो छोटे बारीक रेशे (वजन में लगभग एक तिहाई) (लिंट) को सीड (वजन में लगभग दो तिहाई) से अलग करता है। लिंट, जिसे आम तौर पर हिंदी में रुई के नाम से जाना जाता है। रुई (लिंट) को गांठों के रूप में दबाकर बांधा जाता है। प्रत्येक गांठ का वजन लगभग 165-170 किलोग्राम होता है। सूती धागा (कॉटन यार्न) या धागा बनाने के लिए बेल कॉटन कच्चा माल है जिसे बाद में कपडे़ बनाने के लिए बुना जाता है।
 
वैश्विक परिदृश्य
  • वैश्विक कपास क्षेत्र और उत्पादन क्रमश: 30-31 मिलियन हेक्टेयर्स और 20 मिलियन टन हैं।
  • चीन, अमेरिका और भारत तीन सबसे बडे़ कपास उत्पादकों के साथ अमेरिका, भारत, चीन, इजिप्ट, पाकिस्तान, सूडान और पूर्वी योरोप कपास के सबसे बडे़ खेती करने वाले देश हैं।
  • वैश्विक निर्यात में अमेरिका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत और चीन दोनों ही अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते और वे शुद्ध रूप से आयातक हैं।
  • ग्राहकों में चीन अग्रणी है बाद में भारत, पाकिस्तान, अमेरिका और टर्की का नाम आता है।
 
वैश्विक कपास आपूर्ति और वितरण
वैश्विक कपास उत्पादन और खपत मिलियन गांठें
वर्ष की शुरुआत 1 अगस्त 2005-06 2006-07 2007-08 2008-09 2009-10
उत्पादन 24.97 26.74 26.17 23.5 23.5
खपत 24.91 26.64 26.13 23.0 23.4
निर्यात 9.76 8.12 8.36 6.2 6.5
समाप्ति स्टॉक्स 12.70 12.70 12.35 12.9 12.9
कॉटलुक ए इंडेक्स* 56.15 59.15 72.90 60 56
स्रोत आईसीएसी
कॉटलुक ए इंडेक्स सीजन एव्हरेज सेंट्स प्रति पौंड, 2009-10, आईसीएसी द्वारा प्राइज प्रोजेक्शन है।
 
भारतीय परिदृश्य
  • भारत का उत्तरी क्षेत्र छोटे और मध्यम तार के कपास का प्रमुख उत्पादक है। जबकि दक्षिणी राज्य प्रमुख रूप से लंबे तार (लांग स्टेपल्स) उगाते हैं। मध्य क्षेत्र लांग एवं मीडियम स्टेपल्स उगाते हैं।
  • 30 मिलियन गांठों (1 गांठ (बेल)=170 किग्रा) के वार्षिक उत्पादन के साथ भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है। भारत के पास कपास-क्षेत्र भी सबसे बडा़ है। भारत 25 प्रतिशत क्षेत्र से वैश्विक कपास का लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन करता है।
  • विश्व में सबसे बडा़ कपास-क्षेत्र अपने पास होने के बावजूद भारत 787 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के वैश्विक औसत के मुकाबले केवल 550 किलोग्राम के कम औसत प्रतिफल के कारण कपास के वैश्विक उत्पादन में तीसरे नंबर पर आता है।
  • हालांकि देश के लगभग सभी राज्यों में कपास की खेती होती है, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरयाणा, राजस्थान, तमिल नाडु और कर्नाटक ये 9 राज्य कपास-क्षेत्र और उत्पादन की 95 प्रतिशत से अधिक भागीदारी रखते हैं।
  • भारत में कपास मार्च से सितंबर के दौरान बोया जाता है और इसकी फसल कटाई सितंबर से अप्रैल के दौरान की जाती है। फसल का चरम मार्केटिंग सीज़न नवंबर से मार्च महीने के दौरान होता है। 19 बिलियन यूएस डॉलर का निर्यात और साल 2006-07 (पी) के दौरान 30 बिलियन यूएस डॉलर स्थानीय वस्त्र और परिधान के साथ भारतीय वस्त्र और परिधान उद्योग विश्व में सबसे बडा़ स्थान रखता है। यह कुल राष्ट्रीय औद्योगिक उत्पादन का तकरीबन 14 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है जो कि जीडीपी योगदान की 4 प्रतिशत है। यह लगभग 35 मिलियन लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है और अन्य 56 मिलियन लोग संबद्ध गतिविधियों में संलग्न हैं। वस्त्र उद्योग के लिए कपास सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल है।
  • भारत में स्पिनिंग मिलों द्वारा यार्न में रूपांतरित कुल फाइबर की 75 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी कपास की होती है और देश में उत्पादित कुल कपडा़ एवं वस्त्र सामग्री का 58 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है।
 
बाजार को प्रभावित करने वाले कारक
  • केवल एक तिहाई क्षेत्र ही सिंचाई के अधीन है और इस कारण कपास का उत्पादन अनियमित मौसम और कीटकों के हमले के परिणामस्वरूप वर्ष-दर-वर्ष काफी बदलता रहता है।
  • उत्पादित कपास का 80 प्रतिशत से अधिक भाग प्रतिवर्ष 31 मार्च तक बेच दिया जाता है और कीमतें अप्रैल से तेज होना शुरू हो जाती हैं तथा केवल सितंबर में ही कम होना शुरू होती हैं जब बाजार में नई फसलों का आगमन शुरू हो जाता है।
  • कपास के लिए भारत सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती हैं और भारतीय कपास निगम (कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया), महाराष्ट्र राज्य को-ऑपरेटिव कॉटन ग्रोवर्स मार्केटिंग फेडरेशन जैसी विभिन्न सरकारी एजेंसियां इस मूल्य पर कपास की खरीद करती हैं।
  • देश में कपास का आयात और देश से कपास का निर्यात।
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