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कैस्टर सीड्स
 
सामान्य लक्षण
  • तेल के व्यावसायिक महत्व के कारण एरंडा की खेती की जाती है।
  • भारत एरंडा सीड और तेल के उत्पादन में अग्रणी है तथा अंतर्राष्ट्रीय एरंडा तेल व्यापार में अहम भूमिका निभाता है।
  • भारतीय एरंडा की वेरायटी में तेल की मात्रा 48 प्रतिशत रहती है और इसमें से 42 प्रतिशत तेल निकाला जा सकता है जबकि बाकी खली में बना रहता है।
  • भारत में एरंडा तेल का वार्षिक उत्पादन 6-9 लाख टन के बीच में है। वर्ष 2003-04 में 8.04 लाख टन एरंडा का उत्पादन हुआ था।
  • भारत के एरंडा सीड के उत्पादन में गुजरात का योगदान 86 प्रतिशत है। इसके बाद आंध्र प्रदेश और राजस्थान है। एरंडा की पैदावार मुख्यतः गुजरात के मेहसाणा, बनासकांठा और सौराष्ट्र / कच्च और आंध्र प्रदेश के नालगौंडा एवं महबूबनगर जिलों में होती है।
  • एरंडा खरीफ फसल है । एरंडा के बुआई का सीजन जुलाई से अक्टूबर तक और कटाई का सीजन अक्टूबर से अप्रैल तक है।
  • भारत सालाना लगभग 2.0 – 2.4 लाख टन के लगभग व्यावसायिक केस्टर ऑयल, 50,000 – 60,000 टन केस्टर सीड एक्सट्रेक्शन और 15,000-20,000 टन केस्टर सीड का निर्यात करता है।
  • भारत के कुल उत्पादन 90 प्रतिशत केस्टर सीड और केस्टर ऑयल गुजरात और आंध्र प्रदेश में उत्पादित होता है। केस्टर सीड और केस्टर ऑयल यूरोपियन यूनियन, यूएस और जापान सहित विभिन्न देशों को निर्यात किया जाता है।
  • गुजरात और आंध्र प्रदेश में घरेलू बाजार काफी विकसित है। उत्पादन केंद्रों के निकट महत्वपूर्ण मंडियों में बंदरगाहों से उपलब्ध निर्यात भाव तथा घरेलू भाव उपलब्ध हैं।
 
वैश्विक परिदृश्य
विश्व में केस्टर सीड की सालाना उपज 12 से 18 लाख टन के बीच घटती-बढ़ती रहती है। 64 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ भारत एक अग्रणी उत्पादक है जिसके बाद चीन एवं ब्राजील का क्रमशः 23 प्रतिशत और 7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ क्रम आता है।
 
प्रमुख व्यापार केंद्र
गुजरात में एरंडा तेल का मुख्य बाजार राजकोट, अहमदाबाद, गोंडल, गडवाल, भाबर, दिशा और कड़ी तथा आंध्र प्रदेश में जेडचेरला और येमिंगनूर हैं।
 
बाजार के प्रभावी कारक
  • उपज और भाव प्राप्ति के आधार पर एरंडा सीड बुआई के रकबे में बदलाव
  • मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की प्रगति पर आधारित फसल का विकास
  • चीन और ब्राजील की फसल का आकार। घरेलू बाजार में अन्य वनस्पति तेल के साथ तुलनात्मक भाव
  • मुख्य शहरों से एरंडा तेल की देशावर मांग, यूएस, यूरोप और जापान से एरंडा तेल की निर्यात मांग।
  • बुआई के समय एरंडा सीड के भाव में मजबूती का रुख और कटाई के समय नरमी फसल अवधि के दौरान भाव में 200 रु. से 350 रु. का उतार-चढ़ाव दिखाई देता है।
  • एरंडा सीड उत्पादक और पेराई करने वाले कमोडिटी को बेहतर भाव की आशा में बेचने के पहले जमा करके रखते हैं। एरंडा तेल को कंटेनर में बिना बिगड़े लंबे समय तक रखा जा सकता है।
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