| कार्बन क्रेडिट – 21वीं सदी का बाजार |
| जहां विश्व के सभी देशों में प्रदूषण के स्तर को खत्म करने की कवायद जोरों पर है और आर्थिक गतिविधियों को तवज्जों देने के लिए निरंतर प्रयास जारी है, ऐसे में उत्सर्जन व्यापार का क्षेत्र एक नई जीवन रेखा के रूप में उभर रहा है। गौरतलब है कि विश्व के सभी देशों में क्योटो प्रोटोकॉल (केपी) की बढ़ती मांग और विकसित देशों की प्रदूषित उद्योगों में बढ़ती हुई सामाजिक गतिविधियों के चलते वैश्विक उत्सर्जन व्यापार में कार्बन उत्सर्जन व्यापार कई लाख डॉलर के बाजार के रूप में उभर रहा है। जिस कदर यूरोप में कार्बन क्रेडिट व्यापार में अचानक उछाल आया है, उससे अंदाजा है कि आने वाले वर्षों में उत्सर्जन व्यापार के क्षेत्र में काफी संभावनाएं व्याप्त हैं। |
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क्या है कार्बन क्रेडिट? सामान्यतः एक टन कार्बन डाईआक्साइड या इतनी ही मात्रा में ग्रीन हाउस गैस के बराबर ‘एक कार्बन क्रेडिट’ होता है। साफ-सुथरी विकासशील यांत्रिकीय (सीडीएम) परियोजनाओं को अमल में लाने के लिए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सामाजिक व्यवस्था सबा (यूएनएफसीसीसी) द्वारा कार्बन क्रेडिट को प्रमाणित प्रमाण पत्र दिया गया है। कार्बन क्रेडिट के संभावित खरीदारों को विविध सारणी-1 के देशों से संबंधित होना जरूरी है, जिसके देश में क्योटो प्रोटोकाल के तहत नियमों का अनुसरण किया जाता हो या उन निवेशकों को क्रेडिट्स खरीदने का मौका मिल सकता है, जो केपी चरण (2008-12) के दौरान ऊंची कीमतों में क्रेडिट्स बेचने की क्षमता रखते हों। पर्यावरण में जीएचजी उत्सर्जन को रोकने के लिए क्योटो प्रोटोकाल (केपी) के विस्तारीकरण को केपी के वर्तमान हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा आगामी बैठकों में अनुसमर्थन किया जाना आवश्यक होगा। |
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| मांग और आपू्र्ति के स्रोत |
उभरता हुआ कार्बन क्रेडिट बाजार शुरू होने वाले उत्पाद / सार्वजनिक जनोपयोगी परियोजनाओं को बडे़ पैमाने पर बिजली बचत उपकरणों की श्रृंखला के उपयोग को तवज्जों देता है। इसके अलावा अन्य किसी यांत्रिक या तकनीक में ग्रीनहाऊस गैस के उत्सर्जन में गिरावट लाता है तो वह कार्बन क्रेडिट बेचकर अच्छी आय हासिल कर सकता है। कार्बन क्रेडिट को उन परियोजनाओं से भी उत्सर्जित किया जा सकता है, जिन्होंने सारणी-1 के गैर राष्ट्रों से साफ-सुथरी विकसित यांत्रिकीय परियोजना से कार्बन क्रेडिट अर्जित किया है या सारणी-1 के संयुक्त कार्यान्वित देशों से कार्बन क्रेडिट अर्जित किया जा सकता है या जिनके पास अधिक मात्रा में कार्बन क्रेडिट है, वह बाजार में आपूर्ति कर सकते हैं। कार्बन क्रेडिट के खरीदार मुख्यतः सारणी-1 के राष्ट्र होते हैं, जो निम्न प्रकार से हैं- - खासकर यूरोपीय राष्ट्र, जैसा कि वर्तमान में यूरोपीय संघ उत्सर्जन व्यापार योजना (ईयू ईटीएस) सर्वाधिक कार्यान्वित बाजार।
- अन्य बाजार भी हैं, जिसमें जापान, कनाडा, न्यूजीलैंड आदि राष्ट्रों का समावेश है।
सारणी-1 के गैर राष्ट्र जैसे कि भारत, चीन और ब्राजील आपूर्ति के मुख्य स्रोत हैं। |
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| कार्बन क्रेडिट में व्यापार |
उत्सर्जन व्यापार एक यांत्रिकीय प्रक्रिया है, जो देशों को आपस में कानूनी अनुबंधित उत्सर्जन लक्ष्य के तहत उत्सर्जन छूट की खरीद और बिक्री की अनुमति देता है। वर्तमान में यूरोपीय एक्सचेंजों में वायदा अनुबंधों के तहत कार्बन क्रेडिट का सक्रिय व्यापार किया जाता है। दरअसल, बहुत सारी कंपनियां वायदा बाजार में शामिल होकर कार्बन क्रेडिट से संबंधित मूल्य जोखिम का प्रबंध कर रही है और साथ ही परियोजनाओं से संबंधित जोखिम, पॉलिसी जोखिम आदि से संबंधित जोखिमों का भी सक्रिय रूप से प्रबंधन कर रही है। गौरतलब है कि कार्बन क्रेडिट से संबंधित विविध जोखिमों को ध्यान में रखते हुए वायदा अनुबंधों के तहत कार्बन छूटों का बडी़ मात्रा में व्यापार अब यूरोप में सच्चाई बन चुका है। वर्तमान में विविध परियोजनाओं में शामिल उद्यम, सार्वजनिक परियोजनाएं, विनिर्माण संस्थाएं, ब्रोकर, बैंक और अन्य कई वायदा अनुबंधों के तहत पर्यावरण संबंधित योजनाओं में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
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| दरों को प्रभावित करने वाले कारक |
| पूरे विश्व भर में गैर-सारणी बी राष्ट्रों (विकासशील राष्ट्र) में जलवायु एक्सचेंजों की दरें विविध कारणों से प्रभावित होती हैं। जिसमें ईयूए दरें, कच्चे तेल की कीमतें, बिजली, कोयला, प्राकृतिक गैस, आर्थिक गतिविधियों का स्तर जो सारणी I और अन्य राष्ट्रों से संबंधित हैं आदि कारक हैं। |
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| मूल्यों को प्रभावित करने वाले कुछ मुख्य कारक |
- आपूर्ति-मांग में भिन्नता
- योजनाओं के विवाद
- कच्चे तेल की कीमतें
- कोयले की कीमतें
- कार्बन डाईआक्साइड उत्सर्जन
- मौसम / ईंधन की कीमतें
- यूरोपीय संघ एलाउंजेस (ईयूए) की दरें
- विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव
- वैश्विक आर्थिक विकास
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| कार्बन क्रेडिट से संबंधित जोखिम |
बाजार और जलवायु एक्सचेंज दरों के उत्पादकों के लिए योजना संबंधित जोखिम है जिसमें आपूर्ति की ओर जोखिम शुरुआत से लेकर डीएनए स्वीकृति जोखिम रहता है। क्लाइमेट एक्सचेंज दर के अनुमोदन का समावेश एक संपूर्ण साफ-सुथरी विकसित यांत्रिक परियोजना की स्वीकृति के तहत होता है। इसके अलावा इन जोखिमों के तहत एक और मेजबान जोखिमदार होता है जो आपूर्ति और मांग दोनों तरफ के वास्तविक बाजारू खिलाड़ियों को सही दिशा दर्शाता है। अधिकतर साफ-सुथरी विकसित योजनाएं अपनी प्रकृति के अनुरूप जलवायु एक्सचेंज दरें अर्जित करने के लिए काफी लंबा समय लेती हैं और आगे कथित तौर पर बड़े पैमाने में जोखिम उठाती हैं। किसी विशिष्ट स्थिति के अंतर्गत सीईआर अर्जित करनेवालों को आय की वापसी की स्थिति में ऐसा भी समय आता है कि सीईआर के लिए निवेश की गयी राशि की वापसी भी नहीं हो पाती है और इस प्रकार साफ-सुथरे विकसित योजनाओं की नींव रखने की संभावनाएं लंबे समय तक क्षीण हो जाती हैं। साफ-सुथरे विकसित परियोजनाओं के लिए दिया गया विकास प्रक्रिया का लंबा समय और जिसमें जोखिम शामिल हो, ऐसी परिस्थिति में जरूरी हो जाता है कि वे अपने संभावित क्रेडिट की वायदा बाजार में पहले ही बिक्री कर दें ताकि संभावित नुकसान को सही मायने में कम किया जा सके। |
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| कार्बन क्रेडिट व्यापार में शामिल संभावित निम्न प्रकार से हैं |
हेजर्स - उत्पादक
- हाजिर बाजार के मध्यस्थ
- अंतिम खरीददार
निवेशक - निर्णायक (आर्ब्रिट्रेजर्स)
- पोर्टफोलियो प्रबंधक
व्यापक सहभागिता उद्देश्य के साथ शामिल विविध सहभागी - जिंसों के वित्त पोषक
- ऋण प्रदान करनेवाली संस्थाएं
- बिजली उत्पादों में जोखिम उठानेवाले कार्पोरेट्स
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| संभावित आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत |
साफ-सुथरी यांत्रिकीय योजना के तहत सीईआर अर्जित करने में भारत अग्रणी है, जिसके लिए उत्सर्जन व्यापार में अपार संभावनाएं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2010 तक कार्बन क्रेडिट का व्यापार 100 अरब अमरीकी डॉलर के आंकड़े को छू सकता है। वर्तमान में 300 कुल पंजीकृत सीडीएम योजनाएं हैं, जो यूएनएफसीसीसी में पंजीकृत सीडीएम परियोजनाओं के लगभग एक तिहाई के बराबर है। बतौर मेजबान देश भारत का प्रमाणित सीईआर आंकड़ा 34,101,315 (लगभग 3.4 करोड़) पुनः यूएनएफसीसीसी द्वारा प्रमाणित सीईआर आंकड़ों के मुकाबले एक तिहाई है। मूल्यों के रूप में (भारतीय मुद्रा), यह आंकड़ा हजारों करोड़ रुपये में चल रहा होगा। उल्लेखनीय है कि भारत में पंजीकृत परियोजनाओं की संख्या में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है। यूएनएफसीसीसी में कुल 160 नयी परियोजनाएं पंजीकृत हुई थी, जिसके आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ पिछले वर्ष ही भारत की आधे से भी अधिक परियोजनाएं पंजीकृत हुई है। संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं कि जनजागरण अभियान चलाये जाने की सूरत में भविष्य में इस आंकड़े में और भी बढ़ोत्तरी हो सकती है। भारत में अपेक्षित सालाना सीईआर की संख्या लगभग 2.8 करोड़ के आसपास है और इन सभी सीईआर को 15 यूरो में बेंच दे, तो औसतन प्राप्त होने वाली रकम लगभग 2500 करोड़ रु. तक जा सकती है। |
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| सीईआर की अपार संभावनाओं वाले उद्योग: |
- कृषि
- बिजली (नवीनीकरण और गैर-नवीनीकरण स्रोत)
- विनिर्माण
- ईंधन से किया हुआ क्षण भंगुर उत्सर्जन (ठोस, तेल और गैस)
- धातु उत्पाद
- खदान और खनिज पदार्थों के उत्पाद
- केमिकल्स
- वनरोपण और वनीकरण
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| एमसीएक्स की भूमिका |
| कमोडिटीज फ्यूचर्स बाजार के लिहाज से एमसीएक्स मुख्य भूमिका निभाकर उत्सर्जन व्यापार को बढ़ावा देकर इस व्यापार के उभरते हुए कमोडिटी बास्केट में अधिक से अधिक कार्बन क्रेडिट जोड़ सकता है। भारत में कार्बन क्रेडिट के उदयमान और संभावित आपूर्तिकर्ताओं में अधिकाधिक कार्बन क्रेडिट अर्जित करने के लिए होड़ सी मची हुई है, जिसके लिए उक्त आपूर्तिकर्ता अपनी उदयमान और वर्तमान परियोजनाओं की सहायता लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कार्बन क्रेडिट की बिक्री कर रहे हैं। उम्मीद है कि भारत कार्बन क्रेडिट का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन सकता है। दो एक्सचेंजों के बीच हुए गठबंधन से भी उम्मीद है कि कार्बन क्रेडिट के लिए बेहतर मूल्य का आविष्कार हो सकता है, जिसमें खरीद और बिक्री से होने वाली जोखिम की भी भलीभांति भरपाई होने की उम्मीद है। |
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| एमसीएक्स कार्बन अनुबंध के लाभ |
| वर्तमान में भारत में सिर्फ द्विपक्षीय सौदों और व्यापार के तहत मध्यस्थों द्वारा बिक्री का परिचालन बड़े पैमाने पर होता है, ऐसे में उत्पादक को उसके कार्बन क्रेडिट का उचित मूल्य प्राप्त नहीं होता है। इस परिदृश्य में एमसीएक्स लाभ के अवसर प्रदान करता है, जो इस प्रकार है |
- विक्रेता और मध्यस्थ मूल्य जोखिम के प्रति संभावित हानि से स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं।
- परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाली तरलता के लिए अग्रिम बिक्री सहायक हो सकती है और इससे लागत मूल्य भी कम की जा सकती है।
- यहां किसी प्रकार के समकक्ष जोखिम की संभावनाएं नहीं है, जिसके लिए एक्सचेंज व्यापार की जिम्मेदारी लेता है।
- खरीदारों और विक्रेता दोनों के लिए एक्सचेंज उचित मूल्य देने के प्रति वचनबद्ध है।
- व्यापारियों को एकमात्र प्लेटफार्म पर लाया जाता है, इस प्रकार, खरीदार और विक्रेता को बेहतर विश्वसनीयता के साथ श्रमपूर्ण प्रक्रिया से परे रखा जाता है।
- एमसीएक्स फ्यूचर्स शीघ्र ही संदर्भ मूल्य प्रदान करता है। अब तक भारतीय कार्बन क्रेडिट बाजार में मूल्यों के लिहाज से पारदर्शिता नहीं देखी गई है, जिस कारण विक्रेता अपनी निर्धारित राशि नहीं प्राप्त कर पाता है।
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