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सोना |
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सोनाका कांट्रेक्ट
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| सोना | | | | | | सोना मानव के संज्ञान में सबसे पुरानी कीमती धातु है और हजारों सालों से इसे वैश्विक मुद्रा, एक कमोडिटी, एक निवेश और सुंदरता की एक वस्तु के रूप में मान्यता प्राप्त है। | | | | प्रमुख विशेषताएं - सोना अद्वितीय है क्योंकि यह कमोडिटी और एक मौद्रिक संपत्ति दोनों ही है।
- इसकी स्थिरता और उच्च मूल्य इसे वस्तुत: अविनाशी बनाती है और यह सुनिश्चित करती है कि इसे हमेशा बरामद और इसका पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है।
- आर्थिक अभिप्राय में वास्तव में सोने की खपत नहीं है क्योंकि सोने का स्टॉक अनिवार्य रूप से स्थिर रहता है जबकि सिर्फ इसका स्वामित्व एक पार्टी से दूसरी पार्टी के पास बदलता रहता है।
- यद्यपि सोने का खान उत्पादन अपेक्षाकृत स्थिर है, पुनर्नवीनीकृत सोना (या स्क्रैप) यह सुनिश्चित करता है कि जरूरत के वक्त आसान कारोबारी आपूर्ति के लिए एक संभावित स्रोत है, और यह सोने की कीमतों को स्थिर रखने में सहायक है।
- सोने की कीमतों को निर्धारित करने वाली आर्थिक ताकतें भिन्न होती हैं और कई मामलों में सर्वाधिक वित्तीय संपत्तियों को प्रभावित करने वाली ताकतों के विरुद्ध रहती हैं।
| | | | वैश्विक आपूर्ति एवं मांग परिदृश्य | - वर्ष 2008 के अंत तक के अनुसार गोल्ड फील्ड्स मिनरल्स सर्विसेस (जीएफएमएस) द्वारा अनुमानित जमीन के ऊपर कुल सोने का स्टॉक तकरीबन 1,63,000 टन के आस-पास है।
- इस कुल स्टॉक का 51% अनुमानित तौर पर आभूषण के रूप में है, 18% आधिकारिक रिजर्व, 17% निवेश के रूप में, 12% औद्योगिक प्रयोजनों हेतु उपयोग और 2% बेहिसाब है।
- निवेश एवं उद्योग जैसे अन्य मुख्य चालकों के साथ वार्षिक़ स्वर्ण मांग की लगभग दो तिहाई हिस्सेदारी आभूषण (ज्वेलरी) की है। पिछले तीन सालों (2005-2008) में सकल वार्षिक़ स्वर्ण मांग औसतन 3530 टन रही है। हालांकि कीमतों में तेज वृद्धि के चलते वर्ष 2009 में इसके थोडा़ नीचे जाने की आशा है।
- प्रत्येक बाजार विभिन्न सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारकों द्वारा संचालित हैं और पांच देश अर्थात भारत, चीन, यूएसए, टर्की, सऊदी अरब और यूएई 60% से अधिक स्वर्ण मांग में हिस्सा रखते हैं।
- पिछले तीन वर्षों से औसतन लगभग 2,455 टन प्रति वर्ष के साथ सकल वैश्विक खान उत्पादन अपेक्षाकृत स्थिर है। सोने के स्क्रैप की रिसायक्लिंग और आधिकारिक क्षेत्र की बिक्री आपूर्ति के अन्य प्रमुख स्रोत हैं जो पिछले तीन सालों में औसतन 1084 टन और 378 टन रहे।
- वर्ष 1880 से दक्षिण अफ्रीका प्रमुख सोना उत्पादक रहा है और यह अनुमान है कि अब तक उत्पादित पूरे सोने का लगभग 50% इस राष्ट्र से आया है। जबकि वर्ष 1980 के शुरुआती दौर के दौरान इसने तकरीबन 1000 टन स्वर्ण उत्पादन किया पर वर्ष 2007 में उत्पादन गिरकर मात्र 272 टन रह गया।
- वर्ष 1905 से लेकर पहली बार ऐसा हुआ कि दक्षिण अफ्रीका सबसे बडा़ उत्पादक नहीं रहा और वर्ष 2007 में 276 टन के उत्पादन के साथ विश्व के सबसे बडे़ स्वर्ण उत्पादक के रूप में चीन ने दक्षिण अफ्रीका को पीछे छोड़ दिया। दूसरे प्रमुख उत्पादक देश रहे यूएसए, आस्ट्रेलिया, रूस और पेरू।
| | | | वैश्विक स्वर्ण बाजार | लंदन में ओटीसी मार्केट्स (एलबीएमए), न्युयॉर्क और ज़्युरिख न्युयॉर्क में गोल्ड डेरिवेटिव एक्सचेंजेस– सीएमई (कॉमेक्स), टोक्यो (टोकॉम), मुंबई (एमसीएक्स) इस्तांबुल, दुबई, हांगकांग और सिंगापुर महत्वपूर्ण उपभोक्ता क्षेत्रों के लिए प्रवेश द्वार हैं। | | | | विश्व स्वर्ण उद्योग में भारत | | (पूर्णांकित आंकडे़) भारत (टन में) विश्व (टन में) % भागीदारी | | (पूर्णांकित आंकडे़) | भारत (टन में) | विश्व (टन में) | % भागीदारी | | कुल स्टॉक | 15000 | 160000 | 9 | | सेंट्रल बैंक होल्डिंग | 558 | 30,100 | 2 | | वार्षिक उत्पादन | 3 | 2450 | 0 | | वार्षिक रिसाइक्लिंग | 250 | 1100 | 23 | | वार्षिक मांग | 700 | 3550 | 20 | | वार्षिक आयात | 600 | --- | --- | | वार्षिक निर्यात | 60 | --- | --- | | | | भारतीय स्वर्ण बाजार - भारत विश्व का सबसे बडा़ स्वर्ण उपभोक्ता है। भारतीय सामान्य रूप से वैश्विक सोने के 25 प्रतिशत, 700-750 टन के लगभग की खरीदारी करते हैं।
- हालांकि वर्ष 2008 और 2009 में कीमतों में तेज वृद्धि ने वर्ष 2008 में सकल मांग को 660 टन तक गिरकर काफी प्रभावित किया। पिछले साल की समान अवधि के 553.5 टन के मुकाबले वर्ष 2009 की प्रथम तीन तिमाहियों में कुल मांग 265 टन रहने से इसके वर्ष 2009 में आगे और कम होने की आशा है।
- भारत का घरेलू प्राथमिक उत्पादन लगभग 2-3 टन प्रतिवर्ष बहुत कम है जिसके कारण देश को अपनी सर्वाधिक घरेलू आवश्यकताओं के लिए सोने का निर्यात करना पड़ता है।
- इस प्रकार भारत भी इस पीली धातु का सबसे बडा़ आयातक है और प्रतिवर्ष औसतन 600 टन के करीब आयात करता है। हालांकि वर्ष 2008 का स्वर्ण आयात लगभग 400 टन तक नीचे गिर गया और ऊंची कीमतों के कारण वर्ष 2009 में इसके लगभग 200-220 टन तक और गिरने की आशा है।
- भारतीय स्वर्ण मांग निश्चित रूप से सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में लिपटी हुई है। भारत में इसे बचत और निवेश साधन के रूप में भी देखा जाता है और बैंक जमा के बाद भारत में यह दूसरा पसंदीदा निवेश है।
- भारतीय समाज में स्वर्ण-संग्रह की प्रवृत्ति भी काफी हद तक है और भारतीयों के पास अनधिकृत स्वर्ण स्टॉक के 15,000 टन से अधिक होने का अनुमान है जो कि सकल वैश्विक स्वर्ण स्टॉक का लगभग 9% है।
- स्थानीय घरेलू खपत मानसून, फसल और शादी के मौसम से तय होती है। भारतीय आभूषणों की कुल बिक्री बढ़ती कीमतों के प्रति और यहां तक कि अस्थिरता के प्रति संवेदनशील है।
- शहरों में सोना शेयर बाजार और उपभोक्ता माल की व्यापक रेंज से प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है।
- विश्व के शेष भागों की तुलना में भारत में परिष्करण (रिफाइनिंग), परखना (असेइंग), उन्हें स्टैंडर्ड बारों, सिक्कों में बनाने की सुविधाएं गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों ही तरह से तुच्छ हैं।
- जुलाई 1997 में आरबीआई ने वाणिज्यिक बैंकों को बिक्री हेतु या ज्वेलरों और निर्यातकों को ऋण के रूप में देने के लिए सोने के आयात के लिए अधिकृत किया। वर्तमान में सोने के आयात में 13 बैंक सक्रिय हैं। इसने वर्ष 1986 से 1991 के दौरान सोने की अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के बीच की असमानता को 57 प्रतिशत से वर्ष 2001 में 8.5 प्रतिशत तक कम कर दिया।
बाजार को प्रभावित करने वाले कारक - भारतीय स्वर्ण कीमतें अत्यंत रूप से अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के साथ सहसंबद्ध हैं। हालांकि भारतीय रुपये और अमेरिकी डॉलर (आईएनआर- यूएस डॉलर) में उतार-चढा़व घरेलू स्वर्ण कीमतों को प्रभावित करता है और इसलिए उसका करीबी अनुसरण ज़रूर करना चाहिए।
- वैश्विक कीमतें अर्थव्यवस्था की ताकत, उभरते बाजारों का बढ़ता महत्व, मौद्रिक चाल, ब्याज दरों जैसे प्रमुख प्रभावशाली मैक्रो-इकोनॉमिक कारकों के साथ-साथ विभिन्न कारकों द्वारा संचालित होती हैं।
- बढ़ती वैश्विक निवेशक मांग और लगभग स्थिर आपूर्ति के बीच आपूर्ति एवं मांग प्रभावित करने वाले प्रमुख घटक हैं।
- जब भी ऐसे रिपोर्टें आती हैं, सरकारी सोने के भंडार में परिवर्तन, सेंट्रल बैंकों द्वारा खरीद और बिक्री की रिपोर्टें कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों के रूप में कार्य करते हैं।
- सोने में निवेश शेयर बाजारों, रियल एस्टेट और क्रूड ऑयल जैसी अन्य कमोडिटीज में प्राप्त होने वाले तुलनात्मक प्रतिफलों से प्रभावित होता है।
- घरेलू स्तर पर मांग और उसके फलस्वरूप कीमतें कुछ हद तक शादी जैसी मौसमी कारकों से प्रभावित होती हैं। ग्रामीण मांग मानसून, कृषीय उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सेहत से प्रभावित होती है।
| | | | मापन | | वजन रूपांतरण सारणी | | से बदलना | से | द्वारा गुणा | | ट्रोय औंस | ग्राम | 31.1035 | | ग्राम | ट्रोय औंस | 0.0321507 | | किलोग्राम | ट्रोय औंस | 32.1507 | | किलोग्राम | तोला | 85.755 | | | | | शुद्धता | सोने की शुद्धता कैरेट्स और फाइननेस (विशुद्धता एवं बारीकी) के संदर्भ में आंकी जाती है कैरेट: शुद्ध सोना 24 कैरेट के रूप में परिभाषित है विशुद्धता: प्रति एक हजार में पार्ट्स इस प्रकार, 18 कैरेट =1000 पार्ट्स का(18/24) वां भाग = 750 विशुद्धता | | ऊपर | | | |
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आई-गोल्ड (साप्ताहिक क्लीयरिंग) 17 अक्टूबर 2007 के आगे
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आई-गोल्ड मिनी (साप्ताहिक क्लीयरिंग) 17 अक्टूबर 2007 के आगे
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