| सामान्य लक्षण |
- कच्चा तेल हाइड्रोकार्बन्स का मिश्रण है जो तरल दशा में प्राकृतिक भूमिगत भंडारों में पाया जाता है। विश्व की प्राथमिक ऊर्जा खपत में तेल व गैस का प्रयोग लगभग 60 प्रतिशत होता है।
- कृषि सहित लगभग सभी उद्योग किसी न किसी रूप में तेल पर निर्भर हैं। तेल व लुब्रिकेंट्स परिवहन, पेट्रोकेमिकल्स, पेस्टिसाइड्स (कीटाणुनाशक) व कीटनाशक, पेंट्स, परफ्यूम आदि व्यापक एवं सीधे स्तर पर तेल की कीमतों से प्रभावित होते हैं।
- उड्डयन गैसोलीन, मोटर गैसोलीन, नाफ्था, केरोसीन, जेट ईंधन, शुद्धीकृत ईंधन तेल, रेसिडय्लू ईंधन तेल, तरलीकृत पेट्रोलियम गैस, लुब्रिकेंट्स, पैराफिन वैक्स, पेट्रोलियम कोक, असफाल्ट व अन्य उत्पाद क्रूड व अन्य हाइड्रोकार्बन्स मिश्रण को साफ करके प्राप्त किये जाते हैं।
- कच्चे तेल की कीमतें बड़ी तेजी से ऊपर नीचे होती हैं। तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ती है इससे अंदरूनी कीमतें बढ़ती हैं। गैर तेल उत्पादों की मांग घटती है तथा तेल आयातक देशों में निवेश घटता है।
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| ब्रेंट क्रूड आयल की श्रेणियां |
- वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड ऑयल बहुत उच्च गुणवत्ता का होता है। इसका एपीआई घनत्व 31.6 डिग्री है (जो इसे हल्का क्रूड ऑयल बनाता है) इसमें मात्र 0.24 प्रतिशत सल्फर होता है। (इससे यह मीठा कच्चा तेल बनता हैः डब्ल्यू टीआई इसकी कीमत प्रायः 2-4 डालर प्रति बैरल रखता है जबकि ओपेक की निर्धारित कीमत लगभग 1-2 डालर प्रति बैरल ब्रेंट के प्रीमियम पर है। रोजाना के आधार पर कीमतें अधिक भी हो सकती है।
- यूरोप के लिए ब्रेंट क्रूड आयल बेंचमार्क है।
- भारत में कच्चा तेल मध्य पूर्व (उच्च सल्फर वाला) से मंगाया जाता है. आने वाले वर्षों के लिए ओपेक ने चीन व भारत को अपने प्रमुख खरीदारों में माना है।
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| कच्चा तेल इकाई (औसत गुरुत्व) |
- 1 यूएस बैरल = 42 अमेरिकी गैलन
- 1 अमेरिकी बैरल = 158.98 लीटर
- 1 टन = 7.33 बैरल
- 1 लघु टन = 6.65 बैरल
- नोटः- जगह के अनुसार प्रति टन बैरल अलग अलग हो सकता है।
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| वैश्विक परिदृश्य |
- तेल विश्व की कुल ऊर्जा मांग का 40 प्रतिशत पूरा करता है।
- विश्व प्रतिदिन तेल की 76 मिलियन बीबीएल इकाई खपत करता है।
- प्रमुख तेल उपयोगकर्ता देश पहले अमेरिका (20 मिलियन बीबीएल प्रतिदिन) उसके बाद चीन (5.6 मिलियन बीबीएल प्रतिदिन) एवं जापान (5.4 मिलियन बीबीएल प्रतिदिन हैं)।
- वर्ष 2002 में बैलेंस रिकवरेबल रिजर्व 142.7 बिलियन टन अनुमानित था, जिसमें ओपेक ही 112 बिलियन टन था।
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| ओपेक तथ्य |
| ओपेक का अर्थ ‘आर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज’ यह है। 11 विकासशील देशों का संगठन है जो मुख्य रूप से तेल के निर्यात से प्राप्त होने वाली आय पर निर्भर हैं। यही इन देशों की आय का प्रमुख स्रोत हैं। इसके वर्तमान सदस्य हैं- अल्जीरिया, इंडोनेशिया, इरान, इराक, कुवैत, लीबिया, नाइजीरिया, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात तथा वेनेजुएला। |
- ओपेक विश्व के लगभग 40 प्रतिशत कच्चे तेल का नियंत्रण करता है।
- इसके पास विश्व का लगभग 75 प्रतिशत प्रमाणित तेल भंडार है।
- अंतरराष्ट्रीय रूप से इसका निर्यात 55 प्रतिशत तक है।
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| भारतीय परिदृश्य |
- भारत का स्थान विश्व के 10 प्रमुख तेल खपत वाले देशों में है।
- भारत की कुल ऊर्जा खपत में तेल का 30 प्रतिशत प्रयोग होता है। देश की कुल तेल खपत लगभग 2.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। भारत तेल का कोई निर्यात तो नहीं करता पर यह अपनी तेल खपत का 70 प्रतिशत आयात करता है।
- भारत को आपूर्ति में काफी स्तर पर उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है क्योंकि घरेलू तेल उत्पादन मांग के अनुसार घटता बढ़ता है। भारत का उत्पादन केवल 0.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन है।
- भारत के तेल भंडार (लगभग 5.4 मिलियन बैरल) मुख्यतः मुंबई हाई, ऊपरी आसाम, कैमबे, कृष्णा-गोदावरी व कावेरी बेसिन हैं।
- वर्ष 2003 में बैलेंस रिकवरेबल रिजर्व लगभग 733 मिलियन टन था। जिसमें अपतटीय (ऑफशोर) 394 मिलियन टन था और तटवर्ती (ऑन शोर) 339 मिलियन टन था।
- भारत की कुल तेल रिफाइनिंग क्षमता 2.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन है।
- तेल उत्खनन के लिए भारत ने विदेशी भागीदारी को अनुमति दी है। पहले केवल सरकारी उपक्रमों को ही यह काम करना होता था।
- भारत सरकार ने सन 2002 में कीमत निर्धारण तंत्र (एपीएम) को समाप्त कर दिया था। इस समय कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय मार्केट की कीमतों से उच्च समन्वय करती हैं। अब तक कच्चे तेल के उप-उत्पादों की कीमतें 10 प्रतिशत ऊपर नीचे होती सकती है।
- पब्लिक सेक्टर इकाइयों की डिसइनवेस्टमेंट/पुनर्गठन (रिस्ट्रक्चरिंग) और इंडियन रिटेल पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स सेक्टर का अविनियमन (डिरेग्युलेशन) का कार्य प्रगति पर है।
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| क्रूड ऑयल पर मौजूदा कर एवं शुल्क |
| विवरण | दर | | बुनियादी सीमा शुल्क | 10% | | उपकर | Rs.1800 प्रति मेट्रिक टन | | एनसीसीडी* | Rs.50 प्रति मेट्रिक टन | | शिक्षा उपकर | 2% | | चुंगी | 3% | | वार फेज | Rs.57 प्रति मेट्रिक टन | |
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| बाजार को प्रभावित करने वाले कारक |
- ओपेक का उत्पादन और आपूर्ति
- आतंकवाद, मौसम/ तूफान, युद्ध व कोई अन्य अनजाने भौगोलिक कारक जिससे आपूर्ति प्रभावित होती हो।
- वैश्विक मांग, विशेषकर उभरते राष्ट्रों स
- डॉलर के भाव में उतार चढ़ाव
- डीओई / एपीआई आयात एवं भंडार
- रिफाइनरी आग और निधियों की खरीद
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| क्रूड फ्यूचर्स में कारोबार करने वाले एक्सचेंज |
- द न्यूयार्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (एनवाईएमईएक्स)
- द इंटरनेशनल पेट्रोलियम एक्सचेंज ऑफ लंदन (आईपीई)
- द टोक्यो कमोडिटी एक्सचेंज (टीओसीओएम)
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| अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में परिवर्तनशीलता |
| विवरण | % बदलाव की आवृत्ति | | | 0 से 3.1% | 3.2 से 6.2% | 6.3 से 9.3% | 9.3% से | | क्रूड ऑयल के लिए रिफाइनर की अधिग्रहण लागत (संमिश्र) 1 अप्रैल से 4 मार्च का औसत मासिक मूल्य | 8 | 16 | 4 | >8 | |
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| अधिकतम मूल्य परिवर्तन |
| अवधि विचार (अप्रैल 94 से मार्च 04 के डेटा पर आधारित) | प्रतिशत | | मासिक | 23.25 | | वार्षिक | 28.73 | |