| सामान्य विशेषताएं | | इलायची मसालों की रानी है, जबकि मसालों के वर्ग में यह उच्च स्तरीय और ऊंचे दामों में बिक्री के लिए जानी जाती है। सिंचाई के दो वर्षों के बाद इलायची के पौधे अपने रंग में आ जाते हैं और उसमें उत्पादन की क्षमता शुरू हो जाती है। भारत में विशेषतः तीन प्रकार की इलायचियों का उत्पादन होता है, जिसमें मालाबार, मैसूर और सिलोन प्रमुख है। मालाबार और ग्वोटेमाला- इलायची की यह दो छोटी प्रजातियां विश्व में व्यापारिक दृष्टिकोण से काफी अहम मानी जाती है। भारतीय इलायची आकार में थोड़ी छोटी होती है, लेकिन काफी सुगंधित होती हैं। | | | | वैश्विक मांग - आपूर्ति परिदृश्य | - ग्वोटेमाला, भारत, तंझानिया, श्रीलंका, अल साल्वाडोर, वियतनाम, लाओस, कम्बोडिया और पापुआ न्यू गिनिआ आदि देशों को सर्वाधिक इलायची उत्पादन करने की श्रेणी में शुमार है।
- विश्व में 30,000-35,000 मिट्रिक टन इलायची का उत्पादन होता है।
- संपूर्ण विश्व के इलायची उत्पादन में से सर्वाधिक दो-तिहाई हिस्सा का उत्पादन अकेलो ग्वोटेमाला में होता है। वर्ष 2002 में 13500 मिट्रिक टन का उत्पादन करनेवाले ग्वोटेमाला द्वारा वर्ष 2004 के इलायची उत्पादन बढ़कर 2300 मिट्रिक टन तक पहुंच गया।
- खपत परिदृश्य-
| देश | वैश्विक खफत (प्रतिशत) | | पश्चिमी एशिया | 60 | | स्कैंडिनाविया | 16 | | अन्य यूरोपीय देश | 14 | | अमेरिका | 2.5 | | जापान | 3 | | शेष | 4.5 | | - सऊदी अरब एक मात्र इलायची का सर्वाधिक आयात करने वाला देश है, जिसके बाद कुवैत का नंबर आता है।
| | | | भारतीय परिदृश्य | - वर्ष 2002-03 में 11920 मिट्रिक टन का उत्पाद करने के पश्चात वर्ष 2004-05 में 11415 मिट्रिक टन उत्पादन होने के साथ गिरावट आंकी गई।
- भारत में केरल (70 प्रतिशत), कर्नाटक (20 प्रतिशत) और तमिलनाडु (10 प्रतिशत) राज्य इलायची के उत्पादक हैं।
- तकरीबन 90 फीसदी उत्पादन की खपत मात्र देश में ही होती है।
- कुल उत्पादन में से भारत 5 फीसदी से 8 फीसदी का निर्यात करता है। वर्ष 2004-05 के आंकड़ों के मुताबिक भारत ने सऊदी अरब को 42 फीसदी और जापान को 39 फीसदी का निर्यात किया।
- इलायची से निर्मित होनेवाले अन्य उत्पादों में इलायची तेल और इलायची पदार्थों का निर्यात अधिकतर जर्मनी, नीदरलैंड और इंग्लैंड में होता है।
| | | | प्रमुख भारतीय बाजार | | इलायची निलाम केंद्रों पर बेची जाती है। केरल के वंदनमेंडु, बोडीनायकनुर, कुमीली, धेक्केडी, कुमबुम और पट्टीवीरन पट्टी आदि भारत में इलायची के प्रमुख बाजार हैं। | | | | इलायची बाजार पर असर डालनेवाले प्रमुख कारक | - ताजा इलायची हरे रंग की होती है और इसमें विशिष्ट खुशबू भी आती है। वर्तमान आपूर्ति-मांग परिदृश्य के अलावा ताजगी, रंग, जायका और आकार आदि इलायची की कीमतों को उचित दर पर ले जाने में सहायक है।
- इलायची की उच्च गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए इसे ठंडे स्थानों पर रखा जाता है।
- अन्य अंतरराष्ट्रीय श्रेणियों के मुकाबले भारतीय हल्की हरे रंग की इलायची की गुणवत्ता श्रेष्ठ होती है। हालांकि ग्वोटेमाल से होने वाले उत्पादन और निर्यात का भारतीय इलायची की कीमतों पर खासा असर देखा जाता है।
- मौसम और वार्षिक उत्पादन।
- ग्वोटेमाला सहित अन्य देशों में होनेवाले उत्पादन।
- वर्ष के अंत का स्टॉक और स्टॉक के आधार पर होनेवाली खपत का अनुपात।
- बाजार में नई फसल के आगमन का समय।
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